शायरी – ख़ुदा ने मेरी आँखों को नम रखा था

ख़ुदा ने मेरी आँखों को नम रखा था

रेत में पानी का ऐसा वहम रखा था

 

तलाशे-इश्क की चाहत में मरे हैँ हम

यही करने को शायद ये जनम रखा था

 

जिंदगी दोपहर से पहले ढल गई साकी

सुबह में ही तो मैकदे में कदम रखा था

 

किसी की आवाज़ मुझे दूर से बुलाती है

उसी का नाम तो दिल ने सनम रखा था

Advertisements

Leave a Reply