शायरी – ना जाने आज चाँद भी कहाँ खो गया

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वो अंजुमन की आग में लिपटे हुए तारे
आँसू के चिरागों से सुलगते नज़ारे
आसमान की नज़र में अटके हुए सारे

ना जाने आज चाँद भी कहाँ खो गया
फलक का अँधेरा भी दरिया पे सो गया
रोता है हर शै कि आज क्या हो गया

शज़र के शाखों पे नशेमन की ख़ामोशी
फैली है पंछियों में ये कैसी उदासी
क्यूँ लग रही हर चीज़ आज जुदा सी

बजती है सन्नाटे में झिंगुरों की झनक
या टूट रही है तेरी चूड़ियों की खनक
आती है आहटों से जख्मों की झलक

ये रात कब बीतेगी मेरी जवानी की
कब ख़त्म होगी कड़ियाँ मेरी कहानी की
कब लाएगी तू खुशियाँ जिंदगानी की

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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One thought on “शायरी – ना जाने आज चाँद भी कहाँ खो गया”

  1. Dil lekar dil dena bekar ho gaya
    Jo apana tha o v farar ho gaya
    Maine khuda se puchh to bola ki
    usko koi nya dildar mil gaya

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