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शायरी – अपने भी, पराए भी, कुछ दूर के साथी हैं

शायरी दुनिया ने दीवानों को सदियों से है ठुकराया आजाद परिंदों को कोई न समझ पाया चलते हुए राहों पे देखूं मैं, सुनूं भी तो क्या जब शहर के लोगों में ये दिल ही ना मिल पाया

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दुनिया ने दीवानों को सदियों से है ठुकराया
आजाद परिंदों को कोई न समझ पाया

चलते हुए राहों पे देखूं मैं, सुनूं भी तो क्या
जब शहर के लोगों में ये दिल ही ना मिल पाया

हम तुमसे जुड़े थे तो रोने में अदा भी थी
अब टूट गए हैं तो आंसू ना निकल पाया

अपने भी, पराए भी, कुछ दूर के साथी हैं
हमने तो यहां सबको महरूमे-वफा पाया

महरूमे-वफा- जिसमें वफा न हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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