महबूबा शायरी

शायरी – ऐसा लगता है मुझे तू रातभर सोयी नहीं

शायरी ऐसा लगता है मुझे तू रातभर सोयी नहीं खा कसम मेरी कि तू रातभर रोयी नहीं बन गयी है जुल्फें तेरी उजड़ी-उजड़ी सी बहार आंधियों में घिर के भी तू चमन से गई नहीं

love shayari hindi shayari

ऐसा लगता है मुझे तू रातभर सोयी नहीं
खा कसम मेरी कि तू रातभर रोयी नहीं

बन गयी है जुल्फें तेरी उजड़ी-उजड़ी सी बहार
आंधियों में घिर के भी तू चमन से गई नहीं

ये तेरा उदास चेहरा, ये तेरी गमगीन आंखें
आने से पहले जरा तू आईने में झांकी नहीं

हूं मैं हैरां देखकर कि क्या ये तेरा हाल है
इश्क में मुझपे कभी ऐसी कयामत आती नहीं

©RajeevSingh # love shayari

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One comment

  1. Jahan yaad na aaye teri,Woh tanhaai kis kaam ki.Bigderishtenabane,Tokhudaaikis kaam ki.Beshak apni manzil tak jana hai hamein,Lekin jahaan se apne na dikhein,Woh oonchaai kis kaam ki! v. j

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