शायरी – कैसा जंगल है ये समाज देखिए तो जहां

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मुझे दुनिया का दस्तूर निभाना नहीं आता
जान देना ही आता है, जान लेना नहीं आता

कोई भरता नहीं अपने दिल का खाली पन्ना
आंसुओं से यहां सबको लिखना नहीं आता

कैसा जंगल है ये समाज देखिए तो जहां
घोंसलों में पंछियों को रहना नहीं आता

रोज आते हैं सभी लोग यहां दैरो-हरम
मांगना आता है सबको, बांटना नहीं आता

दैरो हरम –  मंदिर मस्जिद

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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