heart touching Shayri

शायरी – कौन सी आस पे जीने की तमन्ना मैं करूँ

मुझे तो दर्द में अपना सुकून मिलता है

और इस दिल में मरना कुबूल रहता है

 

जगनेवालों की दुनिया में सोता हूँ मैं

रात को जगना दिल का उसूल रहता है

 

कौन सी आस पे जीने की तमन्ना मैं करूँ

किसी उम्मीद पे जीना फिजूल लगता है

 

मैं नुमाइश नहीं करता हूँ हँसने का

इस उदासी में ही जीना कुबूल लगता है

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