आज़ादी शायरी

शायरी – तन्हा ही रहने ही आदत है हमको

तन्हा ही रहने की आदत है हमको तो लोगों से मिलके क्या करें अपनी खबर जब हमको नहीं है तो किसके बारे में क्या कहें जब थे चले हम अपने सफर पे कोशिश तो की थी मिलने की सबसे लेकिन हमें तब तज़रबा हुआ था कि इन बेवफाओं से क्या मिलें

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तन्हा ही रहने की आदत है हमको तो लोगों से मिलके क्या करें
अपनी खबर जब हमको नहीं है तो किसके बारे में क्या कहें

 जब थे चले हम अपने सफर पे कोशिश तो की थी मिलने की सबसे
लेकिन हमें तब तज़रबा हुआ था कि इन बेवफाओं से क्या मिलें

देखा है जबसे नंगी हकीकत कपड़े पहनने कम कर दिए हैं
जरुरत है आखिर में एक कफन की तो जिस्म सजाके क्या करें

फक़ीरों के जैसा ही जीना मुनासिब, दिल की सोहबत में मरना अच्छा
लगता है वाज़िब तन्हा ही जीना तो दुनिया में जाके क्या जीएं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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