शायरी – दिल झूमता है मंजर सौ बार देखकर

निकल पड़े हैं मौसम ख़ुशगवार देखकर

सावन की बारिश का मल्हार देखकर

 

बस्ती में बह रही है राहों पे दरिया

मिट्टी भी संग चले हैं दिलदार देखकर

 

कानों में गूँजती है बूँदों की झनकार

हैराँ हूँ मैं कुदरत का फनकार देखकर

 

नाचती है भीग के हरी-भरी वादी

दिल झूमता है मंजर सौ बार देखकर

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