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शायरी – दिल तिश्नगी में दर्द के आँसू भी पी गया

दिल तिश्नगी में दर्द के आँसू भी पी गया

हर बूँद मेरे इश्क के सागर में खो गया

 

सारे सितम सहके भी हम दुख जमा कीए

रोता रहा वो उम्रभर तेरे दर पे जो गया

 

अपनी भी जिंदगी का तमाशा ये खूब है

कभी रातभर जगता रहा, कभी शाम सो गया

 

तुमसे है जितना इश्क उतना मौत से भी है

खूने-जिगर भी हुस्न के मानिंद हो गया

(तिश्नगी- प्यास)

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