महबूबा शायरी

शायरी – दीदार को प्यासी रही मेरी दो अंखियां

शायरी दीवारों से घिरा है दिलबर का आशियां दीदार को प्यासी रही मेरी दो अंखियां किस अंजुमन में आके बुलबुल तू कैद है इस बाग में सैयाद की है बेरहम दुनिया

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दीवारों से घिरा है दिलबर का आशियां
दीदार को प्यासी रही मेरी दो अंखियां

किस अंजुमन में आके बुलबुल तू कैद है
इस बाग में सैयाद की है बेरहम दुनिया

रिश्तों के बंधन ने पहरे लगा दिए हैं
घुट-घुट के काटती हो यौवन की घड़ियां

ये कैसे हालात हैं तेरे गुलशन में ऐ खुदा
भंवरे को मिलती है यहां टूटी हुई कलियां

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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