शायरी – प्यासा है तू बरसों बरस से

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उसी मोड़ पे क्यूं आया मुसाफिर
जहां पर मैं पहले से ही खड़ी थी
पल भर में तुमसे इश्क हुआ था
पल भर ही तो निगाहें लड़ी थी

तुझे देखकर मुझे ऐसा लगा था
कि प्यासा है तू बरसों बरस से
आंखों में शबनम, जुबां पे खामोशी
सूरत में तेरे उदासी जड़ी थी

तूने भी मुझको नजर भर के देखा
मैंने भी तुमको जरा डर के देखा
कुछ तेरी आंखों में हमने पढ़ी थी
कुछ मेरी आंखों ने तुमसे कही थी

अगर मेरा तुमसे है कोई मरासिम
तो आओ चलें हम हसीं सफर पे
नहीं थी खबर ऐ नादां मुसाफिर
हमारे भी किस्मत में ऐसी घड़ी थी

मरासिम – संबंध

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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