शायरी – मैं तो पीती हूँ कि साँस लेने में दिक्कत ना हो

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मैं तो पीती हूं कि सांस लेने में दिक्कत ना हो
कोई तो शख्स हो जिसे मुझसे शिकायत ना हो

वो मिला था कितनी बार मैं गिन ना सकी
अब जो मिल जाए तो फुरकत की नौबत ना हो

रूह जिंदा है मगर जिस्म एक बोझ सा है
अपने शानो पे किसी की ऐसी मैयत ना हो

तिश्नगी है, तमन्ना है और अब तन्हाई भी है
मेरी महफिल में तबस्सुम की कोई आहट ना हो

फुरकत – जुदाई
शानो- कंधों
तबस्सुम- मुसकान
तिश्नगी – प्यास

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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