सूफी शायरी sufi shayari

शायरी – सबकी तरह बेदर्द थे हम जब इश्क से बेगाने थे

शायरी मैं परिंदा भी नहीं और हूं आस्मा भी नहीं लेकिन मेरा दिल इन दोनों से कम भी नहीं मेरा सबकुछ लुट गया, मैं वो खुशनसीब हूं आज दुनिया में कुछ खोने का गम भी नहीं

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मैं परिंदा भी नहीं और हूं आस्मा भी नहीं
लेकिन मेरा दिल इन दोनों से कम भी नहीं

मेरा सबकुछ लुट गया, मैं वो खुशनसीब हूं
आज दुनिया में कुछ खोने का गम भी नहीं

मुफलिसी मेरा खुदा है, फाकामस्ती इबादत है
जिंदगी के बारे में अब कोई वहम भी नहीं

सबकी तरह बेदर्द थे हम जब इश्क से बेगाने थे
जिसने दर्दे-दिल दिया, अब वो सनम भी नहीं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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