शायरी – बस यही सोचके तुम्हें याद किया करता था

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वो भी क्या रातें थी जब खूब जगा करता था
क्या खबर थी कि मैं खुद से दगा करता था

जो हकीकत भी नहीं था, फसाना भी नहीं
मैं कहीं बीच की मंजिल पर रहा करता था

फासलों में भी कई तार थे जुड़ने के लिए
बस यही सोचके तुम्हें याद किया करता था

कुछ शिकायत थी तुमसे भी, खुद से भी
जाने कुछ दर्द था, गजल में लिखा करता था

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari