शायरी – जागता है कोई दर्द ही सोने की जगह

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चांद आया है फलक पे सूरज की जगह
हो गई अब ये धरती रहने की जगह

भीड़ लग जाती है दरिया पे अब शामों में
कहां ढूंढेगी ये तन्हाई बैठने की जगह

ईंट पत्थर के जंगलों में भटकती चिड़िया
जाने किस पेड़ पे है बाकी रहने की जगह

सो रहे हैं सभी लोग इस बस्ती में
जागता है कोई दर्द ही सोने की जगह

फलक- आकाश

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari