शायरी – पल दो पल ये साथ हमारा, एक मुसाफिर एक हसीना

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पागल-पागल सब कहते हैं, दीवाने तुम कहते हो
मुझपे सबने पत्थर फेंका, फूलें तुम बरसाते हो

पल दो पल ये साथ हमारा, एक मुसाफिर एक हसीना
आवारों की गर्दिश में तुम हुस्न की शमा जलाते हो

ये दुनिया मेरी कातिल है, तूने जान बचायी मेरी
मुज़रिम तेरे पीछे पड़े हैं, उनसे तुम टकराते हो

तुमने सागर को देखा है, हमने बस तुमको देखा
ठहरे अश्क में डूबी निगाहें, गहरे दर्द में जीते हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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One thought on “शायरी – पल दो पल ये साथ हमारा, एक मुसाफिर एक हसीना”

  1. meri maiyat me tu na ana ki teri tauhin hogi mai to kandho pe rahuga tu jamin par hogi

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