शायरी – इश्क सच्चा हो तो वो तमाशा क्यूँ बने

love shayari hindi shayari

मेरे खातिर दुनिया की महफिल नहीं
वहां पे मैं नहीं, जहां पे दिल नहीं

इश्क सच्चा हो तो वो तमाशा क्यूं बने
दर्द ऐसा नुमाइश के काबिल नहीं

आज की रात तू मेरे पहलू में नहीं
चांद से आज कुछ भी हासिल नहीं

डूबकर जी गया हूं मैं अपने अंदर
मैं जमाने की लाशों में शामिल नहीं

©RajeevSingh # love shayari

2 thoughts on “शायरी – इश्क सच्चा हो तो वो तमाशा क्यूँ बने”

Comments are closed.