शायरी – शाम से रातभर उनको भी जरा याद करें

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दिन की गर्दिश से निकलके जरा आराम करें
शाम से रातभर उनको भी जरा याद करें

ये शहर लाख बुरा है, मगर वो तो यहीं है
उनकी गलियों में उन्हें रोज ही आदाब करें

हाले-दिल फूल से ऐ बहार ना पूछा करो
कैसे वो अपने छुपे दर्द बेनकाब करें

जो सुहाना सा लगा है, कैसे भुलूं उसको
इश्क के जख्म को हम सीने में बेहिसाब करें

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari