शायरी – था कैसा इशारा तेरे इश्क का वो

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बड़ी बेरुखी से निगाहें थी फेरी, था कैसा इशारा तेरे इश्क का वो
मैं समझी कि तू शरमा रहा है, क्या था इशारा तेरे इश्क का वो

अगर मैं गलत हूं तो ये बता दे, मुझे देख क्यूं उधर मुड़ गया था
तेरीअदा से मैं घबड़ा गई थी, ऐसा था शरारा तेरे इश्क का वो

मासूमियत के बुत से बने थे, मुझे देखकर तुम छुपे जा रहे थे
तुझे देखकर मैं मुसका रही थी, हसीं था नजारा तेरे इश्क का वो

मुझे मेरी मंजिल मिल तो गई है, ले चलो मुझे जहां जाना चाहो
हमारे भी दिल को खबर हुई है, यही था इशारा तेरे इश्क का वो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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