हीर रांझा – 6 – मस्जिद के मुल्ले से रांझे को नोंक झोंक

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मुल्ला ने तीखे तेवर के साथ जताया कि वह मज़हब के सिद्धांतों से अच्छी तरह वाकिफ है। उसने कहा कि नमाज़ उनके लिए है जिनको खुदा पर यकीन हो और यह पाक रूहों को मुक्ति की ओर ले जाता है। लेकिन, मुल्ला ने कहा, “रांझा जैसे अनैतिक आदमी को ईमानदारों के समूह से अपमानित कर बाहर निकाला जाना चाहिए।”

मुल्ला की नैतिकता पर भाषण और चालाकी भरी ये बातें सुनते ही रांझा जोर-जोर से हँसने लगा। उसको हँसते देख आसपास खड़े लोग चकित रह गए और हो सकता है कि उनमें से कुछ खुश भी हुए हों। गुस्से से मुल्ला लाल हो गया।

उसने रांझा से कहा, “खुदा को याद करो। मैं आज की रात तुमको मस्जिद में गुजारने की छूट देता हूँ लकिन ऐ मूर्ख जाट तुम सबेरे अपना सर ढँक कर यहाँ से निकलोगे या मैं चार आदमियों को बुलाकर धक्के मारकर तुमको बाहर करूँगा।”

रांझा उस रात को मस्जिद में सोया और सुबह की पहली किरण के साथ ही आगे यात्रा करने के लिए निकल पड़ा। उस समय चिड़िया चहचहा रही थी, किसान अपने बैलों को लेकर खेतों की तरफ निकल रहे थे और लड़कियाँ दूध के बर्तन धोने की तैयारी में लगी थी। घर की महिलाएं अनाज कूटने में लग गई थी और उनकी आवाज सुनाई दे रही थी।

रांझा चलते-चलते चेनाब नदी के किनारे पहुँचा।   कहानी आगे पढ़ें-

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