एक औरत के प्रेम पत्र – 4 – तुम्हारे प्यार के लिए जी रही हूं!

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प्रिय: कोरे कागज को एकटक देखते हुए मैं तुम्हारे बारे में सोचती रही हूं कि मेरे दिल की जो हालत है, क्या उसका हू ब हू बयां यह खत वहां कर पाएगा जब तुम इसे पढ़ रहे होगे।

फिलहाल मैं यही महसूस कर रही हूं कि मैं इसलिए जी रही हूं क्योंकि तुम मुझे प्यार करते हो और अगर ऐसा नहीं होता तो मेरा जीवन उसी तरह खत्म हो जाता जैसे कलम से स्याही।

अभी तक, मेरे प्रिय, अभी तक! ऐसा कुछ हम दोनों के बीच शुरू नहीं हुआ और हमने कुछ ऐसा नहीं किया जो प्यार में होता है।

मैं फिलहाल यह नहीं कहूँगी कि हमारा प्यार सावन के महीने में पहुंच गया है। मुझे तो ऐसा लगता है बहुत दिनों से यह बसंत महीने में ही रुका हुआ है।

हर अगले दिन पिछले दिन से ज्यादा शिद्दत से मैं तुम्हारे प्यार से बंधती जा रही हूं। इसलिए हर दिन अब एक सा नहीं होता। मेरे लिए आने वाला कल बीते हुए से ज्यादा खुशनुमा होता है।

तुम मेरे हो, मेरे अपने! लेकिन यह उतना सच नहीं है जितना कि मैं तुम्हारी हूं। ऐसा मैं इसलिए कह रही हूं क्योंकि अपना दिल और रूह तुमपे लुटाने के बाद अब मेरे वश में नहीं कि मैं किसी भी चीज को अपने अधिकार में रख सकूं। मेरे अंदर मेरी पहचान खो सी गई है।

मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो चुकी हूं। ये सब कहना हो सकता है कि बेकार की बातें हों लेकिन मैं और क्या कह सकती हूं अगर मुझे कोई बात कहनी हो तो?

क्या मैं कभी सच में तुम्हारे आकाश का सितारा बन पाऊंगी, जैसा कि तुम कहते हो मेरे आशिक।

प्रिय, मेरे लिए एक सितारा तुम हो जाओ और मैं तुम्हारे लिए एक सितारा बन जाती हूँ। जब कभी हम दोनों अलग रहें तो ऐसा हो कि आसमान में हम दोनों के सितारे एक-दूसरे को तलाशते रहें। स्वर्ग के किसी मोड़ पर जाकर वे मिल जाएं और वे साथ-साथ चलते रहें।

बिना किसी अंधविश्वास के मैं यह कह सकती हूँ कि मुझे इन सितारों में एक खूबसूरत जिंदगी दिखती है। क्या तुमने कभी इन आसमानी चीजों में खुद को तलाशा है?

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