ओ हेनरी की कहानी ‘द लास्ट लीफ’ (पढ़ें हिंदी में)-3

सू ने बेहरमेन के कमरे में देखा कि एक कोने में खाली कैनवास पड़ा है जो पच्चीस सालों से किसी मास्टरपीस के बनने का इंतजार कर रहा है। उसने बेहरमेन को जोन्सी की कल्पनाओं के बारे में बताया कि किस तरह से वह उन टूटते पत्तों की तरह खुद को टूटती महसूस कर रही थी।

 

बूढ़ा बेहरमेन की आँखे लाल हो गई और इस तरह की बेवकूफी भरी कल्पनाओं पर वह चिल्लाकर कुछ बोलने लगा। “क्या दुनिया में कोई ऐसा बेवकूफ भी है जो पत्तों के गिरने के कारण खुद मरने के बारे में सोचता है। मैंने आज तक तो नहीं सुना। मैं तुम्हारे लिए मॉडल नहीं बनूँगा। आखिर तुमने उसके दिमाग में ऐसा ख्याल आने ही क्यों दिया?”

 

“वह बहुत बीमार और कमजोर है।”सू कहने लगी ” इसलिए वह इस तरह के ख्याल उसके दिमाग में ज्यादा आते हैं। ठीक है मिस्टर बेहरमेन, अगर आप मेरे लिए पोज़ नहीं देना चाहते, न सही। लेकिन मैं सोचती हूं कि आप भी खूसट बूढ़े हो।”

 

“तुम अन्य सामान्य औरतों की तरह हो।” बेहरमेन बोला, “किसने कहा कि मैं पोज़ नहीं दूँगा। चलो, मैं आता हूँ आधे घंटे में। ओह! मिस जोन्सी जैसी अच्छी लड़की इस जगह बीमार हो गई। किसी दिन मैं अपना मास्टरपीस बनाऊँगा और हम सब यहाँ से दूर कहीं चलेंगे।”

 

जब सू और बेहरमन सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर आए तो जोन्सी सो रही थी। सू ने खिड़की का शेड गिरा दिया और बेहरमेन को दूसरे कमरे में ले गई। वहाँ से दोनों खिड़की के बाहर देखते हुए खामोशी से खड़े रहे। सर्दी की लगातार बारिश गिर रही थी जिसमें बर्फ भी मिला हुआ था। बेहरमेन उस कमरे में पोज़ देकर बैठ गया ताकि सू ड्रॉइंग बना सके। 

 

दूसरी सुबह जब सू सोकर उठी तो उसने देखा कि जोन्सी खिड़की पर गिरे शेड को एकटक देखती हुई सुस्त सी लेटी है।

“शेड को ऊपर कर दो, मैं देखना चाहती हूँ।” उसने बुदबुदाते हुए आदेश दिया।

सू ने उसके आदेश का पालन किया।

 

लेकिन ये क्या! रातभर इतनी तेज़ सर्द हवा के साथ लगातार होती बारिश को वह पत्ता झेल गया और वह अभी भी उस ईंट की दीवार पे पसरी लता से लटका था। यह आखिरी पत्ता था। अभी भी पत्ते की जड़ हरी थी। इसके किनारे का पीलापन यह दिखा रहा था कि यह मुरझा रहा था लेकिन फिर भी जमीन से बीस फीट ऊपर लता में बहादुरी के साथ लटका था।

 

“यह आखिरी पत्ता है।” जोन्सी ने कहा। “मुझे पूरा यकीन था कि यह रात में गिर जाएगा। मैंने हवा के झोंकों को सुना था। यह आज गिर जाएगा और मैं भी मर जाऊँगी।”

“डियर, डियर!” सू तकिये पर अपना चेहरा टिकाकर कहने लगी, “अगर अपने बारे में अच्छा नहीं सोच सकती तो मेरे बारे में सोचो जोन्सी। मैं कैसे जी पाऊँगी।”

 

जोन्सी ने सू के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। यह अपने आप में किसी भी दुनिया का एक अकेला रहस्य है जब कोई आत्मा दूर जाने की सोच लेता है। मरने का ख्याल जोन्सी पर इतना हावी था कि दोस्ती का बंधन या धरती की जिंदगी बहुत पीछे छूट चुकी थी।

दिन गुजर गया और वह उस पत्ते को लता से लटकते हुए देखते रहे। उसके बाद रात हुई और उत्तर की ओर आती हवा अब भी तेज़ थी। बारिश की बूँदे खिड़कियों पर जोर से दस्तक दे रही थी।

 

जब दिन निकला तो जोन्सी ने बहुत बेदर्दी से खिड़की से शेड हटाने के लिए सू से कहा। पत्ता अभी तक लता से जुड़ा था।

जोन्सी बहुत देर तक उसे देखती रही। उसके बाद उसने सू को बुलाया जो किचन में चिकन सूप बना रही थी।

“मैं बुरी लड़की हूँ, सू।” जोन्सी कहने लगी, “कुछ ऐसी बात हुई है जिसकी वजह से यह पत्ता नहीं गिरा। शायद यह मुझे बताना चाहती है कि मैं कितनी स्वार्थी हूँ। मरने के बारे में सोचना पाप है। तुम मेरे लिए सूप और दूध लेकर आओ और- नहीं सू रूको, पहले आईना लेकर आओ और उसके बाद कुछ तकिए। मैं बैठकर देखना चाहती हूँ कि तुम कैसे किचन में काम करती हो।”

 

एक घंटे बाद जोन्सी बोल उठी, “सू, मैं किसी दिन नेपल्स की खाड़ी की पेंटिंग बनाना चाहती हूँ।”

डॉक्टर दोपहर बाद आए और जब वह जाने लगे तो सू उनके साथ बरामदे में आई।

डॉक्टर ने सू से हाथ मिलाते हुए कहा, “अपनी अच्छी सेवा से तुम जीत गई। अब मैं अपना दूसरा केस देखने जा रहा हूँ जो नीचे सीढ़ियों के पास है। उसका नाम बेहरमेन है। कोई कलाकार है। उसे भी न्यूमोनिया हो गया है। वह बूढ़ा और कमजोर है। उन पर न्यूमोनिया ने खतरनाक ढ़ंग से अटैक किया है। उनके बचने की कोई आशा नहीं है। लेकिन वह आज हॉस्पिटल जाएगा ताकि उसकी मौत कुछ आसान हो जाए।”

 

अगले दिन डॉक्टर ने सू को सूचना दी, “जोन्सी अब खतरे से बाहर है। तुम जीत गई। तुम्हारी सेवा का यह कमाल है।”

दोपहर बाद सू बिस्तर पर लेटी जोन्सी के पास गई जो शांति से ऊन का स्कार्फ बुन रही थी। सू ने अपनी बाहें उसके गले में डाल दी।

 

“मुझे तुमसे कुछ कहना है।” सू बोली, “मिस्टर बेहरमेन की मौत आज हॉस्पिटल में न्यूमोनिया से हुई। वह सिर्फ दो दिन बीमार रहे। उनकी देखभाल करने वाले ने पहले दिन पाया कि वह सीढ़ियों के पास दर्द से कराह रहे थे। उनके जूते और कपड़े सर्द बारिश में भीगे थे। कोई इसका अनुमान नहीं लगा सकता था कि उस सर्द डरावनी रात में वह कहाँ गए थे।”

 

“लोगों को उसके बाद बेहरमेन के कमरे में एक जलती हुई लालटेन मिली। एक सीढ़ी मिली जिसे अपनी जगह से खींचा गया था। कुछ इधर-उधर बिखरे ब्रश मिले। एक कलर प्लेट मिला जिसमें हरा और पीला रंग रखा हुआ था। और देखो डियर, खिड़की से बाहर उस ईंट की दीवार को, जिस पर वह पत्ता पेंट किया गया है। क्या तुमको यह बात विचित्र नहीं लगी कि इतनी हवा के बावजूद यह पत्ता हिल-डुल क्यों नहीं रहा है? आह! डार्लिंग, यह बेहरमेन का मास्टरपीस है- जब लता का आखिरी पत्ता उस रात गिरा तो उसी वक्त उन्होंने कँपाने वाली जानलेवा सर्दी में दीवार पर उस पत्ते की पेंटिंग बनाई थी।”

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