शायरी – अकेले में मिलता है वो आशिक की तरह

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इस मुहब्बत में ऐसा भी कभी होता है
खता मैं करती हूं और वो रो देता है

अकेले में मिलता है वो आशिक की तरह
महफिलों में मगर अजनबी सा बन जाता है

अदा तो देखिए जनाब के रूठ जाने की
पास बैठा है मगर बात नहीं करता है

उसके चेहरे पे उदासी का नूर बाकी है
वो मुझे कोई फरिश्ता सा नजर आता है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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