रिश्ता शायरी

शायरी – अपने ही रिश्तों में रहती है ख्वाहिशें इतनी

शायरी प्यार पाने को शहर के लोग जाते हैं तरस ये प्यासे लोग क्या जी सकेंगे सौ बरस अपने ही रिश्तों में रहती है ख्वाहिशें इतनी पूरी न हो तो करते हैं सब एक-दूजे से बहस

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प्यार पाने को शहर के लोग जाते हैं तरस
ये प्यासे लोग क्या जी सकेंगे सौ बरस

अपने ही रिश्तों में रहती हैं इतनी ख्वाहिशें
पूरी न हो तो करते हैं सब एक-दूजे से बहस

घंटों वो परेशान रहे खुशियों की तलाश में
पाया नहीं एक पल भी किसी खुशी का दरस

दुनिया इसी में रफ्ता-रफ्ता मरती जा रही है
शायर की नजर से देखा है जमाने का ये सच

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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