राजीव सिंह

शायरी – इन वादियों में देर तक सावन सिसकता रहा

शायरी बूंदों की हर चोट से पत्ता हिला, हिलता रहा लेकिन हवा की मार से वो टूटकर गिरता रहा इन वादियों में देर तक सावन सिसकता रहा आंसू जमीं के गालों को सहलाकर बहता रहा

love shayari hindi shayari

बूंदों की हर चोट से पत्ता हिला, हिलता रहा
लेकिन हवा की मार से वो टूटकर गिरता रहा

इन वादियों में देर तक सावन सिसकता रहा
आंसू जमीं के गालों को सहलाकर बहता रहा

बारिशों के दोपहर में सूरज कहीं सोता रहा
बादलों के बीच में खर्राटा सा गूंजता रहा

राहत मिली गर्मी से तो लोग मुसकाते रहे
और मैं रोनेवालों की आवाज को लिखता रहा

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

Advertisements

One comment

Leave a Reply