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शायरी – इश्क में इन आंखों में अश्कों की सौगात थी

शायरी इश्क में इन आंखों में अश्कों की सौगात थी चार दिन की चांदनी थी फिर अंधेरी रात थी उम्रभर के वास्ते चिंगारियां मिलीं कुछ सही मुद्दत से मेरे दिल में जली-बुझी सी खाक थी

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इश्क में इन आंखों में अश्कों की सौगात थी
चार दिन की चांदनी थी फिर अंधेरी रात थी

उम्रभर के वास्ते चिंगारियां मिलीं कुछ सही
मुद्दत से मेरे दिल में जली-बुझी सी खाक थी

कदमों के फासले से ही नापेंगे धरती कब तलक
मुझे हर कदम पे एक नई जमीन की तलाश थी

आते हैं वो शब ए याद में इस चांद की तरह
मुझे जिंदगी में बस उसकी रोशनी की प्यास थी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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