शायरी – कांटें मिले हैं जिसको उसे मैं दिलजला लिखूं

love shayari hindi shayari

इस दर्द की तारीफ में अब क्या गिला लिखूं
दिन-रात के फिराक का क्या सिला लिखूं

बस्ती में खिला फूल भी औरों का हो चुका
कांटे मिले हैं जिसको उसे दिलजला लिखूं

घर लौटते हैं किसलिए अपनों से लड़ते लोग
नहीं जानता उन्हें तो क्यूं बुरा भला लिखूं

मेरे सफर में रह सका न कोई मेरे साथ
तन्हाइयों को ही मैं अब सिलसिला लिखूं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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