शायरी – कांटों के इस चमन में हम घायल गिर पड़े

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सावन के मौसम में घटाएं उमड़ पड़े
किश्तों में आसमान से बादल गिर पड़े

हमको नहीं खबर कि रहगुजर है कैसा
जाने क्या हुआ कि तेरे कूचे में चल पड़े

काबू नहीं है अब मुझे जेहनो-जिगर पे
मुझसे बिना पूछे मेरे आंसू निकल पड़े

अपना ये गुलिस्तां है जिसमें गुल ही नहीं है
कांटों के इस चमन में हम घायल गिर पड़े

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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