गजल शायरी

शायरी – कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को

शायरी वो आंखों में समंदर की तरह आता है आईने में भी पत्थर की तरह आता है कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को टूटा सपना भी दिलबर की तरह आता है

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वो आंखों में समंदर की तरह आता है
आईने में भी पत्थर की तरह आता है

कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को
टूटा सपना भी दिलबर की तरह आता है

वक्त-बेवक्त बेसबब बेतकल्लुफ सा
मेरे सीने में वो खंजर की तरह रहता है

ना गमगीन हो मेरे दोस्त मेरी मैयत पे
कोई दुनिया में मुसाफिर की तरह आता है

©RajeevSingh # love shayari

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