शायरी – जख्म तन्हा ही रहे तो कहीं अच्छा है

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सूनी रातों का शहर है वीराने में
खाक बिखरा है दिल का दीवाने में

दिल में घायल परिंदा तड़पता है
कितनी देरी है मसीहा को दवा लाने में

जख्म तन्हा ही रहे तो कहीं अच्छा है
बड़ी तकलीफ है किसी के छोड़ जाने में

रात के साये में वो चले आए हैं
शाम से शम्मा बुझी है आशियाने में

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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