आशिक शायरी

शायरी – दीवानगी में न जाने कल कहां पे रहूँगा

शायरी ये दिल किसी मुकाम पर ठहर न सका मीलों तलक चला मगर मंजिल पा न सका दीवानगी में न जाने कल कहां पे रहूंगा आवारगी में अपना घर भी बना न सका

love shayari hindi shayari

ये दिल किसी मुकाम पर ठहर न सका
मीलों तलक चला मगर मंजिल पा न सका

दीवानगी में न जाने कल कहां पे रहूंगा
आवारगी में अपना घर भी बना न सका

सर पे कफन है और जलता हुआ दिल है
चाहा बहुत पर जिस्म को खुद जला न सका

तड़पती हुई लहरों को शायद नहीं मालूम
साहिल की प्यास को वो कभी बुझा न सका

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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