महबूबा शायरी

शायरी – दीवानों के रहगुजर में कांटों का सिलसिला

हिंदी शायरी दीवानों के रहगुजर में कांटों का सिलसिला आंसुओं के सफर में हाय दिल को क्या मिला मजबूर है आलम दिले-नादान की महफिल में तन्हा सी बेबसी में खुद ही से करें गिला

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दीवानों के रहगुजर में कांटों का सिलसिला
आंसुओं के सफर में हाय दिल को क्या मिला

मजबूर है आलम दिले-नादान की महफिल में
तन्हा सी बेबसी में खुद ही से करें गिला

अमावस के खंजर ने जख्मों को कुरेदा है
माहताब की ख्वाहिश में जगने से ये मिला

शम्मा तो बुझ गई है इस रात के पहर में
अब इस अंधेरे में खोजूं मैं और क्या भला

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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