शायरी – माना कि तेरे हुस्न के काबिल नहीं हूं मैं

love shayari hindi shayari


पत्थर की तरह दिल को तराशा है बार-बार
एक ताजमहल हमने बनाया है बार-बार

हम तो वफा की राह पे तन्हा ही रह गए
पर रहगुजर पे तुमको तलाशा है बार-बार

आए हैं उसी मोड़ पे, है अपना नहीं कोई
इस शहर ने दीवाने को ठुकराया है बार-बार

माना कि तेरे हुस्न के काबिल नहीं हूं मैं
पर इश्क तेरे दर पे मुझे लाया बार-बार


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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