शायरी – मैं गुनाहों के आईने में ही जी लेता हूं

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हम सितारों की तरह एक दिन बिखर जाएंगे
चांद न पा सके तो टूटकर मर जाएंगे

इश्क मेरा बदनाम हुआ है इस दुनिया में
अब तो हर रस्म के धागों को तोड़ जाएंगे

मैं गुनाहों के आईने में ही जी लेता हूं
हम मसीहा नहीं जो सूली पे चढ़ जाएंगे

मेरे आंसू तो मुजरिम हैं, रिहा होने दो
कैद मुझमें रहा तो नस-नस में भर जाएंगे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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