आंसू शायरी जख्म शायरी

शायरी – ये तजरबा है कि अपनों ने हमें जख्म दिया

हिंदी शायरी हम तो हर मौसम में गुनाह किया करते हैं जिस्म की कैद से अश्कों को रिहा करते हैं अपनी आजादी हमें जां से अधिक प्यारी है इसलिए तो हम भटकते हुए जिया करते हैं

love shayari hindi shayari

हम तो हर मौसम में गुनाह किया करते हैं
जिस्म की कैद से अश्कों को रिहा करते हैं

अपनी आजादी हमें जां से अधिक प्यारी है
इसलिए तो हम भटकते हुए जिया करते हैं

ये तजरबा है कि अपनों ने हमें जख्म दिया
अब तो तन्हाई में ये दर्द सहा करते हैं

रात होती है तो तुम याद बहुत आती हो
तेरे ही गम में हर रात जगा करते हैं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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