महबूबा शायरी

शायरी – रू ब रू हुस्न के चांदनी कुछ नहीं

शायरी अपने रूख से ये पर्दा हटा दीजिए मेरे महफिल की शम्मा जला दीजिए आपकी राह पे मेरा दिल है बिछा रहगुजर पे कभी तो चला कीजिए

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अपने रूख से ये पर्दा हटा दीजिए
मेरे महफिल की शम्मा जला दीजिए

आपकी राह पे मेरा दिल है बिछा
रहगुजर पे कभी तो चला कीजिए

रू ब रू हुस्न के चांदनी कुछ नहीं
शाम से ही ना घर में छुपा कीजिए

आप शायर से क्यूं खफा हो गए
बेरूखी की वजह तो बता दीजिए


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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