शायरी – सितम के निशां पड़े हैं दिल के बदन पर

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अपनी तकदीर पे हमको बदगुमां है
मेरा कातिल ही अब मेरा रहनुमा है

बड़ी रंगीन है दुनिया की महफिल
बस हमारे घर में उदासी का शमा है

सितम के निशां हैं दिल के बदन पर
कहीं दर्द जख्मों के, कहीं आंसू थमा है

कौन कहता है कि तुमसे मिल न सके
तेरी तस्वीर को हमने कई बार चूमा है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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