शायरी – चिड़िया है मुंतजिर कि आप जाल डालिए

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खंजर न शमशीर पर आप धार डालिए
अपनी ही दो नजर से हमें मार डालिए

मेरे मरमरी से दिल को कोई पूछता नहीं
नाजुक से इस गुलाब को जरा तोड़ डालिए

इस रंगमहल में है मेरी बेरंग जिंदगी
अपनी अदा से इसमें कुछ रंग डालिए

हम जी नहीं सकते हैं अब आपके बिना
चिड़िया है मुंतजिर कि आप जाल डालिए

(मुंतजिर- इंतजार में)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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