शायरी – हमसे भी क्यूं रोज तुम आंखें चुराया करते हो

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सारी दुनिया से तो तुम खुद को किनारा करते हो
हमसे भी क्यूं रोज तुम आंखें चुराया करते हो

धोखा है हर शाम को सूरज का डूब जाना भी
ये कहकर तुम चांद पे ऊंगली उठाया करते हो

जंगल को भी हिला गया आंधियों का काफिला
कैसे तुम अपनी आहें सीने में छुपाया करते हो

फिर तुम रात की साज पे गाने लगे अपनी गजल
जब शहर सोता है तो तुम दीप जलाया करते हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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