शायरी – कब से नहीं आया चांद उससे मिलने

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कल भी बड़ी दूर तक खाली शाम थी
कुछ गमगीन थी, कुछ गुमनाम थी

आंचल में आंसू लिए बहती थी दरिया
वो जिस गली में बहुत बदनाम थी

दरिया के उस पार जाने कौन था बैठा
जिसके लिए इस पार वो परेशान थी

कब से नहीं आया चांद उससे मिलने
उसकी परछाई रोशनी के बिना बेजान थी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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