शायरी – कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को

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वो आंखों में समंदर की तरह आता है
आईने में भी पत्थर की तरह आता है

कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को
टूटा सपना भी दिलबर की तरह आता है

वक्त-बेवक्त बेसबब बेतकल्लुफ सा
मेरे सीने में वो खंजर की तरह रहता है

ना गमगीन हो मेरे दोस्त मेरी मैयत पे
कोई दुनिया में मुसाफिर की तरह आता है

©RajeevSingh # love shayari

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