हीर रांझा – 8 – सब पर छाया रांझे का जादू

love shayari hindi shayari

रांझा की बांसुरी ने ऐसा जादू किया था कि लोगों ने लुड्डन की बात पर ध्यान ही नहीं दिया। बांसुरी बजाते-बजाते जब रांझा के दिल को थोड़ी राहत मिलने लगी तो उसने आस-पास घेरे लोगों को नजरअंदाज करते हुए अपना जूता उठाया और नदी के पानी में उतरने लगा।

उसे ऐसा करते देख लोग कहने लगे, ‘नहीं, नहीं, नदी में मत उतरो। चेनाब की धार गहरी और बहुत तेज है। इसकी गहराई को कोई नहीं माप सका। एक क्षण में यह नदी जान ले सकती है।’

लुड्डन की बीवियों ने रांझा के कपड़े का छोड़ पकड़ लिया और उसे लौटने को कहने लगी। लेकिन रांझा ने सबसे कहा, ‘जिसकी जिंदगी कष्ट में हो, वह मर जाए, यही सही होगा। वे खुशनसीब हैं जिनसे उनका घर-बार नहीं छूटता। मेरे मां-बाप नहीं रहे तो भाइयों ने मुझे दुख देकर घर से निकाल दिया।’

रांझा ने अपने कपड़ों को सर पर रख लिया और अपनी आत्मा को मजबूत करते हुए नदियों के खुदा का नाम लिया और पानी में चलने लगा।

लोग उसकी तरफ दौड़े और उसे पकड़ कर वापस ले आए। लोग उसे जोर-जोर से कहने लगे, ‘भाई, मत जाओ, निश्चित रूप से तुम नदी में डूब जाओगे। हम तुमको अपने कांधों पर ले चलेंगे। हम सब तुम्हारे सेवक हैं और तुम हम सबके प्यारे हो।’ रांझा के बांहों को उन लोगों ने पकड़ा और खींच कर नाव पर लाया।कहानी आगे पढ़ें

कहानी शुरू से पढ़ें

कहानी के पन्ने
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34
Advertisements

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.