शायरी – मैं क्यूँ भटक रहा हूँ, ये किसकी तलाश है

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मैं क्यूँ भटक रहा हूँ, ये किसकी तलाश है
तेरी तलाश है मुझे या खुद की तलाश है

शहर के जंगल में बचे हैं महलों के बरगद
बेघर हुए पंछी को एक शाख की तलाश है

हर इंसान के अंदर एक मुकम्मल जहां है
मुझको उस मुकाम के राह की तलाश है

तेरी गली में घूमता आशिक हूँ बेसहारा
सदियों से इश्क को हुस्न की तलाश है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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