शायरी – कैसे सहूं इस दर्द को मुझको जरा बताओ ना

कैसे सहूं इस दर्द को मुझको जरा बताओ ना

अपनी तरह ये जिंदगी जीना मुझे सिखाओ ना

 

तुम किस तरह सहती हो, दिन-रात जीवन के सितम

सीने में दुख सहेजकर जीती हो कैसे ऐ सनम

दिल में छुपे क्या राज हैं मुझको जरा सुनाओ ना

 

अपनों ने तुमको गम दिये, दुनिया तेरी बनी दुश्मन

हजार जख्म खाके भी खामोश क्यों हो ऐ सनम

मेरे सामने भी उदास हो, नजरें उठा मुसकाओ ना

कैसे सहूं इस दर्द को मुझको जरा बताओ ना

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