शायरी – कौन दुनिया में इतना वफादार है

कुछ इस पार है, कुछ उस पार है

दोनों ही तरफ देखो मझधार है

 

दिल की बस्ती में घर बसाया नहीं

दुनियावाले तू कितना समझदार है

 

गम का तूफां उठा उस समंदर में

जिसके साहिल पे मेरा घर-बार है

 

बेवफा से कोई क्यूं शिकवा करे

कौन दुनिया में इतना वफादार है

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