शायरी – जगती रातों में तू मेरे अंदर कहीं पे रहती है

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महकी सांसें, दुखता सीना, रोती आंखें कहती है
जगती रातों में तू मेरे अंदर कहीं पे रहती है

दरिया के आंसू में डूबा एक चिराग बुझ गया
लेकिन दिल में डूबके भी तेरी शम्मा जलती है

देखकर मैं रूक गया था, दूर तू जाती रही
ऐसा अक्सर ही होता है जब राहों पे तू मिलती है

लिखते-लिखते सो गया था आज भी तुमपे गजल
पर मेरे ख्वाबों में आकर ये गजल तू गाती है

©RajeevSingh #love shayari

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