शायरी – जब तक ये चिरागे दिल सीने में जलते हैं

जब तक ये चिरागे दिल सीने में जलते हैं

तब तक ही मुझे दर्द परायों में मिलते हैं

 

मैं हूं कोई नदिया, वो है कोई सागर

हाय कौन किसको रोके, जब दोनों ही रोते हैं

 

कितने ही दायरों को हम तोड़ चले लेकिन

देखें कि जमाने को कब छोड़ के जाते हैं

 

सोचूं कि तमन्ना को जेहन में ना रखेंगे

पर रोज मुझे तेरी तमन्ना याद आते हैं

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