शायरी – तुम अपने कदमों को इस रेत पे नुमाया करो

चुराके शोख निगाहें कभी न आया करो

पलक उठाके ये जन्नत मुझे दिखाया करो

 

घेर लेते हैं जब चांद को काले बादल

इन उंगलियों से अपनी जुल्फें हटाया करो

 

जिगर पे कोई निशानी नहीं तेरे आने तक

तुम अपने कदमों को इस रेत पे नुमाया करो

 

तुमसे पहले कोई शमा मेरे करीब न थी

कभी मुझे भी अपने नूर में जलाया करो

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