महबूब शायरी

शायरी – तेरा दर्द आंसू में गिर पड़ा, पर मैं कभी रो न सका

ले चला तूफान ए इश्क, जाने कहां, किस देस में भटका तेरी तलाश में आवारा दिल किस देस में तेरा दर्द आंसू में गिर पड़ा पर मैं कभी रो न सका तू नदी में जाके बुझ गई, मैं जलता ही रहा रेत में

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ले चला तूफान ए इश्क, जाने कहां, किस देस में
भटका तेरी तलाश में आवारा दिल किस देस में

तेरा दर्द आंसू में गिर पड़ा पर मैं कभी रो न सका
तू नदी में जाके बुझ गई, मैं जलता ही रहा रेत में

जो मिला करे जुदा न हो, जो जुदा हो याद न आए
मुमकिन नहीं ये जहान में, समझा था बड़ी देर में

मैं फूल से जुड़ने को उसकी डाल का कांटा बना
वो फूल मुझे चुभती रही, रोया बहुत इस फेर में

©राजीव सिंह शायरी

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