बेवफा शायरी महबूबा शायरी

शायरी – दुख को आंचल में लिए वो आजकल आयी

जिंदगी देने को ये दर्द की कलम आयी

सांस रूकने लगी तब एक नई गजल आयी

 

इन्तहा खूं से करूं, इब्तिदा आंसू से करूं

इश्क की दास्तां में मौत ही मुसलसल आयी

 

थरथराते हैं जब मय शीशे के पैमाने में

सोचता हूं कहां से ये हलचल आयी

 

रात जीती है मुझे जख्म की दवा देकर

दुख को आंचल में लिए वो आजकल आयी

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